एन. रघुरामन का कॉलम:एआई इंसानों की ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ की नकल कभी नहीं कर सकता
मैं जितना ज्यादा अस्पतालों में जाता हूं, उतने ही ज्यादा आत्मविश्वास से बाहर निकलता हूं। क्योंकि जब मैं किसी मरीज और नर्स के बीच बातचीत देखता हूं, जिसमें बॉडी लैंग्वेज को समझने और अनकही बातों को भी ‘बिटवीन द लाइन्स’ पढ़ने की स्किल दिखती है तो मेरा भरोसा यह सोचकर और बढ़ जाता है कि ये गुण पूरी तरह मानवीय हैं। कम से कम अभी तो मशीनें इसके आसपास भी नहीं पहुंच सकतीं। यह लेख उन सभी के लिए है, जिन्हें डर है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मशीनें उनकी जगह ले लेंगी। ‘जॉब्स फॉर द फ्यूचर’ की प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मारिया फ्लिन कहती हैं कि ‘हमें यह समझना होगा कि अलग-अलग उद्योगों और पेशों में जिन स्किल्स को एआई से बदला जाना सबसे कठिन है, वे स्पष्ट रूप से मानवीय हैं।’ यह बिल्कुल सही है, क्योंकि यदि आप आईटी सपोर्ट जैसी तकनीकी भूमिकाओं की वैकेन्सी देखें तो बहुत-सी संस्थाएं यह लिखना नहीं भूलतीं कि उन्हें बेहतर कम्युनिकेशन कर सकने वाले उम्मीदवार की तलाश है। यहां विविध क्षेत्रों पर आधारित पांच ऐसी स्किल्स पेश हैं, जिन्हें विकसित करना सिर्फ नौकरी पाने ही नहीं, बल्कि कॅरिअर ग्रोथ के लिए भी जरूरी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इन क्षेत्रों में आज भी इंसान एआई पर बढ़त बनाए हुए हैं। सहानुभूति : नर्स का पेशा इसका सबसे अच्छा उदाहरण हो सकता है। अस्पतालों में एआई पेपर वर्क जैसे साधारण कार्यों में मददगार हो सकता है, ताकि नर्सों को मरीजों की अधिक सहानुभूतिपूर्वक सेवा करने का समय मिल सके। इस साल की शुरुआत में जब मेरी पत्नी अस्पताल में थीं तो नर्स किसी वरदान जैसी थीं। जो उन्होंने किया, रोबोट नहीं कर सकता। जो आश्वासन उन्होंने दिया, वह मशीन संचालित मिजाजपुर्सी नहीं, बल्कि एक वास्तविक मानवीय जुड़ाव था। इसमें कम्युनिकेशन, विज्ञान और मरीज की रियल टाइम हेल्थ रिपोर्टों की मिली-जुली समझ थी। एक नर्स में मरीज की भावनाएं महसूस करने और उससे जुड़ सकने के मानवीय गुण होते हैं। तेजी से ठीक होने के लिए यही देखभाल सबसे जरूरी है। रिश्ते बनाना : हाल ही में मैं एक रियल एस्टेट ऑफिस गया। वहां सर्वाधिक तनाव में वे कर्मचारी थे, जो फ्लैट या मकान बुक करा चुके ग्राहकों से पैसा इकट्ठा कर रहे थे। उनमें से कुछ अपने काम में बेहद अच्छे थे, क्योंकि उन्होंने फाइलें और डेटाबेस बनाने का काम एआई को सौंप दिया और खुद केवल लोगों से फेस-टु-फेस मिलकर व्यक्तिगत रिश्ते बनाने पर ध्यान दे रहे थे। जब भुगतान के विवाद हुए तो वही पारस्परिक कौशल कारगर साबित हुआ। लोगों की अपेक्षाओं को संभालने, नाराजगी कम करने और आवश्यक रिश्ते बनाने के लिए इंसान का होना जरूरी है। एआई यह नहीं सोच सकता। क्रिटिकल थिंकिंग : एआई मॉडल जानकारी एकत्र कर जवाब बना सकते हैं, लेकिन वे गलतियां नहीं निकाल सकते। इंसानों के पास एआई द्वारा तैयार जवाब का अर्थ निकालने के लिए समझ, क्रिटिकल थिंकिंग और विषय-विशेषज्ञता होनी ही चाहिए। एआई चैटबॉट्स में यूजर्स की मिजाजपुर्सी करने और उनकी भावना को सही ठहराने की प्रवृत्ति होती है। वे यूजर के कार्यों को किसी इंसान की तुलना में 49% अधिक सही ठहराते हैं। इसी जगह पर इंसान को जरा रुक कर गंभीरता से सोचना पड़ता है। अंतरात्मा का होना : सही और गलत में फर्क करना या अंतरात्मा की आवाज सुनना मानवीय कौशल है। याद रखिए, हमारी भावनाओं को हम भीतर महसूस करते हैं। ऐसा एआई मॉडल बनाना बेहद कठिन है, जो सभी चीजों के लिए नैतिक हो।
निर्णय करना : रणनीति तैयार करने या ब्रेन आइडेंटिटी विकसित करते वक्त एआई अस्पष्ट परिस्थितियों में निर्णय करने और क्रिएटिव आइडिया देने के प्रति कम सक्षम है। इंसान अपने समग्र ज्ञान और अनुभवों के आधार पर निर्णय करते हैं, जबकि एआई डेटा के आधार पर करता है- जो तरीका अस्पष्ट हालात में सही-से काम नहीं करता। फंडा यह है कि भले ही आर्थिक बदलावों, तकनीकी परिवर्तनों और श्रम बाजार व्यवधानों के बीच कोई भी टूल्स और टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही हों, लेकिन ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ ही वो चीज है, जो कर्मचारी को वर्कप्लेस पर सच में मूल्यवान बनाती है।