पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:नकारात्मकता से बाहर आने में बड़ी मदद करती है प्रार्थना

Nov 1, 2026 - 14:00
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:नकारात्मकता से बाहर आने में बड़ी मदद करती है प्रार्थना
जीवन में खुश रहने का एक दार्शनिक तरीका यह भी है कि जीवन में जो उदासी के पल गुजरे हों, उनको महसूस करें। सबके जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी घटती हैं कि उस समय आप बहुत ही केंद्रित, चिंतित हो गए हों तो उन घटनाओं को याद करें और फिर प्रार्थना करें। प्रार्थना नकारात्मक भावना से बाहर निकालने में बड़ी मदद करती है। जब हम ईश्वर से कोई प्रार्थना करते हैं तो वह शब्द जो मौन में होते हैं, हमको अकेलेपन की स्थिति से बाहर निकालते हैं। प्रार्थना के शब्द जब दिल को छूते हैं तो पूरे शरीर में इतना रोमांच, उमंग आ जाती है कि हम शांति महसूस करते हैं। प्रार्थना इस बात की अनुमति देती है कि उदासी का भी आनंद उठाया जा सकता है। उदासी और शांति का निकट का रिश्ता है। उदासी जब किसी परमशक्ति से संबंध बनाती है तो शांत हो जाती है। और शांति जब परमशक्ति से कट जाती है, तो वह उदासी का रूप ले लेती है। इसमें प्रार्थना बहुत काम आती है। अपनी प्रार्थना का ढंग खुद तय करें, पर प्रार्थना करें जरूर।