पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम- अशांति मिटाने के लिए एकाग्रता भी एक टूल है
प्रबंधन की दुनिया में इस पर काफी बहस होती है कि फोकस्ड रहना ठीक है या मल्टीटास्किंग बेहतर है। इसे धार्मिक दृष्टि से देखें तो राम बहुत फोकस्ड थे और कृष्ण की लीला मल्टीटास्किंग वाली रही। हमारे लिए इन दोनों में से क्या बेहतर है, यह हमारी वृत्ति पर निर्भर करता है, स्थिति पर नहीं। क्योंकि उसूल यह है कि हमें 80% सफलता 20% प्रयासों से मिल जाती है। अब वो 20% प्रयास कौन-से हैं, इसका चयन बड़ा महत्वपूर्ण है। इसीलिए बड़े सपनों को साकार करने के लिए कदम छोटे, मगर ठोस उठाएं। हर निर्णय लेने के पहले एकाग्रता से जरूर गुजरें। एकाग्रता एकदम से नहीं आ जाती। जब भी आप एकाग्र होने का प्रयास करेंगे, कई विचार आक्रमण करेंगे। बहुत सारे व्यक्ति प्रवेश कर जाएंगे। इसलिए एकाग्रता जिस अभ्यास से आती है, उसे योग कहते हैं। प्रबंधन की दुनिया में धीरे-धीरे अब योग का महत्व इसीलिए बढ़ेगा कि जैसे-जैसे एआई आएगा, लोगों की एकाग्र होने की वृत्ति खत्म हो जाएगी। वे भौतिक रूप से सफल तो हो जाएंगे पर अशांत भी होंगे। और अशांति मिटाने के लिए एकाग्रता भी एक टूल है।