बरखा दत्त का कॉलम:ट्विशा मामले में कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं

Aug 21, 2026 - 06:28
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बरखा दत्त का कॉलम:ट्विशा मामले में कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं
‘ये चार्जशीट एक मजाक है।’- यह बात ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मुझसे कही। उनकी आवाज कांप रही थी और गला रूंधा हुआ था। वे ट्विशा की मौत के चर्चित मामले में दाखिल की गई सीबीआई चार्जशीट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। क्योंकि सीबीआई इस नतीजे पर पहुंची है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या से हुई थी। उनकी हत्या नहीं की गई थी। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने कहा, सीबीआई ने हमें वह बताने में 90 दिन लगा दिए जिसका हमें पहले से अंदेशा था। उन्होंने मुझे उन बुनियादी सवालों की संख्या गिनाई, जिन्हें सीबीआई पूछने और उनका जवाब तलाशने में विफल रही थी। और वे सही हैं, क्योंकि सीबीआई की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अंतिम रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां और विरोधाभास हैं। सीबीआई के निष्कर्ष पूरी तरह से एम्स (दिल्ली) में हुए दूसरे पोस्टमार्टम पर आधारित हैं। ट्विशा के परिवार का कहना है कि सीबीआई ने मामले के सबसे चौंकाने वाले पहलू पर गहराई से पड़ताल नहीं की। सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने घटनास्थल से उस लिगेचर (जिम बेल्ट) को जब्त किया था, जिसके बारे में सीबीआई का कहना है कि ट्विशा ने उसी से अपनी जान दी। लेकिन शर्मा ने इस बेल्ट को दो दिनों तक अपने निजी वाहन में रखा और पहले पोस्टमार्टम के समय इसे जमा नहीं किया। इसलिए साक्ष्य के तौर पर इसकी विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। ट्विशा के परिवार का कहना है दूसरे पोस्टमार्टम के समय भी यह बेल्ट मौजूद नहीं था। पोस्टमार्टम के दौरान इसे फॉरेंसिक लैब की जांच के लिए कहीं और भेज दिया गया था। इस तरह आत्महत्या के पक्ष में मामले की बुनियाद बनाने के लिए पेश किया जा रहा केंद्रीय साक्ष्य ही विवादों में घिरा हुआ है। कई और सवाल हैं। अगर ट्विशा ने आत्महत्या की थी, तो उनके पति फरार क्यों हुए? उन्हें किसका डर था? फरारी के दौरान उन्हें किसने शरण दी थी? गिरिबाला सिंह ने परिवार में मौत होने के कुछ ही घंटों बाद उस सीसीटीवी विक्रेता को फोन क्यों किया, जिसने उनके घर में कैमरे लगाए थे? उन्होंने वकीलों की एक टीम को उस ब्यूटी पार्लर में भी क्यों भेजा- जहां ट्विशा को अपनी मौत वाले दिन देखा गया था- ताकि वहां के लोगों पर दबाव डालकर सीसीटीवी फुटेज सौंपने के लिए मजबूर किया जा सके? गिरिबाला को उन फुटेज में इतनी दिलचस्पी क्यों थी? क्या इसलिए कि उन फुटेज में ट्विशा बिल्कुल सहज नजर आ रही थीं, जबकि कुछ घंटे बाद कथित रूप से जान देने जा रहा व्यक्ति वैसी मनोदशा में नहीं हो सकता? और हम इस पर कैसे यकीन करें कि गिरिबाला ने अपने ही घर में सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं की होगी, जबकि उनके पास ऐसा करने के लिए 10 दिन का समय था? चार्जशीट में ट्विशा की ऐसी छवि पेश की गई है, जिसमें वे सास और पति के भावनात्मक उत्पीड़न के कारण मानसिक रूप से परेशान थीं और आत्महत्या के लिए मजबूर हो गई थीं। 12 मई को अपनी मौत वाले दिन भेजे गए ट्विशा के अंतिम वॉट्सएप मैसेज को रिपोर्ट में कोट किया गया है। इसमें उन्होंने अपनी ननद राशि अबरोल से कहा था- ‘उससे कहो कि अपनी पत्नी के बचे हुए अवशेष ले जाए। लेकिन कल। मुझे अभी शांति से मरने दो।’ लेकिन राशि ने मुझसे बातचीत में कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है यह मैसेज ट्विशा ने भेजा था। वे इस मैसेज से हैरान रह गई थीं, क्योंकि ट्विशा अपने माता-पिता के घर लौटने की पूरी तैयारी कर चुकी थीं। उन्होंने नौकरी पाने के लिए अपने पूर्व एम्प्लॉयर्स से भी संपर्क किया था। उसी शाम को ट्विशा ने राशि को मैसेज भेजकर बताया था कि उनके पति हिंसक और आक्रामक हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि समर्थ ट्विशा पर उनके 20 लाख रुपये उसे ट्रांसफर करने का दबाव भी बना रहा था। रात 10 बजे के बाद- जब ट्विशा ने आखिरी बार अपनी मां से बात की- तब भी उन्होंने दोहराया था कि समर्थ बहुत आक्रामक हो रहा था। इसके बाद वे मृत पाई गईं। पहले पोस्टमार्टम में ट्विशा के शरीर पर मौत से पहले लगी सात चोटें दर्ज की गई थीं, जिनमें सिर पर लगी चोट भी शामिल थी। लेकिन दूसरे पोस्टमार्टम में दावा किया गया है कि मेडिको-लीगल महत्व की कोई चोट नहीं पाई गई है। जबकि खुद सीबीआई की रिपोर्ट में ट्विशा का यह आरोप दर्ज है कि समर्थ हिंसक व्यवहार कर रहा था। सीबीआई रिपोर्ट में गिरिबाला की बड़ी बहू को भी प्रताड़ित किए जाने का विवरण है। ऐसे में ट्विशा के परिवार की हताशा समझी जा सकती है। सच्चाई की तलाश में हमें भी उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाते हुए और कठिन सवाल पूछने चाहिए। पहले पोस्टमार्टम में ट्विशा के शरीर पर मौत से पहले लगी सात चोटें दर्ज की गई थीं, जिनमें सिर पर लगी चोट भी शामिल थी। लेकिन दूसरे पोस्टमार्टम में दावा किया गया है कि मेडिको-लीगल महत्व की कोई चोट नहीं पाई गई है। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)